-->

Search This Blog

Powered by Blogger.

Popular Posts

Rojghar samachar

Rojghar samachar/feat-big

Youtube studying

Youtube studying/feat-big

Technology zone

Technology zone/feat-big

Gk zone

Gk zone/feat-big

Shayari Zone

Shayari Zone/feat-big

Videos zone

Videos zone/feat-big

Slider

CALL LATTER

6/CallLatter/grid-small

Sports

Contact us

Name

Email *

Message *

New Jobs

6/recent/ticker-posts

Slider

5/random/slider

Boxed Layout

false

Currant Affairs daily

Currant Affairs daily/feat-big

Latest Jobs

Latest jobs/feat-big
Edufunzone News updates

Theme Layout

Theme Translation

Trending Posts Display

Home Layout Display

Posts Title Display

404

We Are Sorry, Page Not Found

Home Page

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से संविधान की भावना और अंतरराष्ट्रीय समझौतों के अनुरूप देश के सभी नागरिकों के लिए तलाक के समान आधार के प्रावधान की मांग की गई है। ...
नई दिल्ली, पीटीआइ। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से संविधान की भावना और अंतरराष्ट्रीय समझौतों के अनुरूप देश के सभी नागरिकों के लिए तलाक के समान आधार (uniform grounds of divorce) के प्रावधान की मांग की गई है। भाजपा नेता और अधिवक्‍ता अश्‍व‍िनी कुमार उपाध्याय (Ashwini Kumar Upadhyay) ने इस बारे में जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका में सर्वोच्‍च न्‍यायालय से तलाक के कानूनों में विसंगतियों को दूर करने के लिए कदम उठाने की बाबत केंद्र सरकार को निर्देश दिए जाने की मांग की गई है।

याचिका में कहा गया है कि शीर्ष अदालत तलाक के मसले पर धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर पूर्वाग्रह नहीं रखते हुए सभी नागरिकों के लिए समान कानून बनाने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश जारी करे। यह भी मांग की गई है कि सर्वोच्‍च न्‍यायालय यह घोषणा करे कि तलाक के पक्षपातपूर्ण आधार अनुच्छेद 14, 15, 21 का उल्लंघन करते हैं। ऐसे में सभी नागरिकों के लिए तलाक के समान आधार के बारे में दिशानिर्देश जारी किया जाए।
याचिका में कहा गया है कि अदालत विधि आयोग को तलाक संबंधी कानूनों का अध्ययन करने और तीन महीने के भीतर अनुच्छेद 14, 15, 21 और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप सभी नागरिकों के लिए तलाक के समान आधारों (Uniform Grounds of Divorce) का सुझाव देने का निर्देश जारी करे। याचिका में कहा गया है कि हिंदू, बौद्ध, सिख और जैन समुदाय के लोगों को हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत तलाक के लिए आवेदन करना पड़ता है।

वहीं मुस्लिम, ईसाई और पारसी समुदायों में तलाक के लिए के अपने पर्सनल लॉ हैं। यहां तक कि यदि पति पत्‍नी में कोई एक विदेशी नागरिक है तो उसे विदेशी विवाह अधिनियम 1969 के तहत तलाक की अर्जी देनी होगी। ऐसे में तलाक का आधार लिंग और धर्म के आधार पर तटस्थ नहीं है। इसलिए तलाक के समान आधार (uniform grounds of divorce) के प्रावधान होने चाहिए।

Leave A Reply